तराईमाल बंजारी मंदिर मार्ग पर छेड़खानी और अश्लील वीडियो बनाने वाले 3 दोषियों को जेल : रायगढ़ न्यायालय ने सुनाई 3-3 साल की सजा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के घरघोड़ा न्यायालय ने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों पर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी घरघोड़ा, श्री दामोदर प्रसाद चंद्रा के न्यायालय ने एक महिला की गरिमा भंग करने, बंधक बनाकर अश्लील वीडियो-फोटो तैयार करने और उसे वायरल करने की धमकी देने वाले तीन आरोपियों को दोषसिद्ध पाते हुए 3-3 वर्ष के सश्रम कारावास (कठोर जेल) और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला पूंजीपथरा पुलिस की मजबूत विवेचना और पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आया है।

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बंजारी मंदिर से लौटते वक्त गोदगोदा नाला के पास घेरा था रास्ता

अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री सत्यनारायण महिलाने ने न्यायालय के समक्ष पूरा मामला प्रस्तुत किया। घटना 14 अक्टूबर 2020 की है, जब पीड़िता अपने मंगेतर के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर बंजारी मंदिर (तराईमाल) दर्शन करने गई थी। मंदिर से वापस लौटते समय गोदगोदा नाला घाट के पास वे रुके। इसी दौरान वहां घात लगाकर बैठे आरोपी तरुण कुमार साहू, छबिलाल साहू और उग्रसेन साहू वहां आ धमके। आरोपियों ने दोनों को जबरन रोककर गाली-गलौज शुरू कर दी और डरा-धमकाकर उनके पास रखे नगदी और मोबाइल फोन लूट लिए।

कपड़े उतरवाकर बनाए थे अश्लील वीडियो, वायरल करने की धमकी देकर मांगी थी रकम

आरोपियों की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी; उन्होंने पीड़िता के साथ घिनौनी और अश्लील हरकतें करते हुए दोनों को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद आरोपियों ने जबरन दोनों के कपड़े उतरवाए और अपने मोबाइल फोन से उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने धमकी दी कि यदि उन्हें मोटी रकम नहीं दी गई, तो वे इन अश्लील वीडियो और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे। डरी-सहमी पीड़िता ने 23 अक्टूबर 2020 को थाना पूंजीपथरा पहुंचकर आपबीती सुनाई और आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई।

तत्कालीन उप निरीक्षक गिरधारी साव की प्रभावी विवेचना और सायबर साक्ष्य आए काम

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्कालीन पूंजीपथरा थाने में पदस्थ उप निरीक्षक गिरधारी साव ने तत्परता से जांच शुरू की। पुलिस ने घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए। उप निरीक्षक गिरधारी साव ने जब्त मोबाइलों को डिलीट किए गए डेटा और वीडियो रिकवरी के लिए फॉरेंसिक लैब (FSL) भेजा। लैब के वैज्ञानिक परीक्षण में मोबाइल से पीड़िता के अश्लील वीडियो बनाने के अचूक तकनीकी और भौतिक साक्ष्य बरामद हुए, जिसने कोर्ट में आरोपियों के झूठ की पोल खोल दी।

9 गवाहों की गवाही से साबित हुआ दोष, आईपीसी की कई धाराओं में सजा

पांच साल पुराने इस मामले के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने माननीय न्यायालय के समक्ष पीड़िता और उसके मंगेतर सहित कुल 9 महत्वपूर्ण साक्ष्यों (गवाहों) के बयान दर्ज कराए। इसके अतिरिक्त 16 अकाट्य दस्तावेजी और भौतिक साक्ष्य पेश किए गए। हालांकि, कोर्ट में अभियोजन पक्ष लूटपाट से संबंधित धाराओं को तकनीकी रूप से सिद्ध नहीं कर सका, लेकिन महिला की अस्मत और गरिमा को ठेस पहुंचाने के मामले में अपराध पूरी तरह साबित हुआ।

न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए तीनों दोषियों तरुण कुमार साहू, छबिलाल साहू एवं उग्रसेन साहू को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-क (यौन उत्पीड़न) एवं 354-ग (महिला की निजी तस्वीरें खींचना) के तहत 03-03 वर्ष के सश्रम कारावास तथा धारा 509-क के तहत 01-01 वर्ष के सश्रम कारावास और नगद अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

इस ऐतिहासिक फैसले पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्री शशि मोहन सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। रायगढ़ पुलिस अपनी वैज्ञानिक और सशक्त विवेचना के माध्यम से हर एक दोषी को कोर्ट से कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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